सोलर पीसीयू(Solar PCU) क्या है?सोलर पीसीयू और सोलर इन्वर्टर में अंतर?

Solar pcu kya hota hai?solar pcu aur solar inverter me antar?

 सोलर पीसीयू(Solar PCU) क्या होता है?(Solar power conditioning Unit in Hindi)


 सोलर पीसीयू(Solar PCU) की फुल फॉर्म सोलर पॉवर कंडीशनिंग यूनिट होती है।सोलर पीसीयू एक एडवांस्ड लेवल का सोलर इन्वर्टर होता है।सोलर पीसीयू(Solar PCU) को हम ऑफ-ग्रिड सोलर इन्वर्टर या स्टैंड अलोन इन्वर्टर भी बोलते हैं क्योकिं सोलर पीसीयू(Solar PCU) को ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम के साथ इनस्टॉल किया जाता है।सोलर पीसीयू हमेशा MPPT सोलर चार्ज कंट्रोलर के साथ आते हैं इसलिए सोलर पीसीयू की कीमत PWM वाले सोलर इन्वर्टर से अधिक होती है।इसके साथ ही आप सोलर पीसीयू की सेटिंग अपने अनुसार सेट कर सकते हैं।

सोलर पीसीयू स्मार्ट और इंटेलीजेंट होते हैं जिसके कारण सोलर पीसीयू दिन में सार्वजनिक ग्रिड बिजली की उपस्थिति होने पर और धूप भी होने पर आपके लोड को ग्रिड बिजली से ना चलाकर सोलर पैनल से आपके लोड को चलाता है।सोलर पीसीयू ग्रिड बिजली की खपत कम करता है और आपके लोड को सोलर सिस्टम से चलाने की पहले प्राथमिकता देता है।जिसके कारण आपका बिजली का बिल ना के बराबर आता है और सलाना आपके पैसों की बहुत बचत होती है।सोलर पीसीयू के मुख्यता इन तीन कंपोनेंट से मिलकर बना होता है- 

1.सोलर चार्ज कंट्रोलर(solar charger controller)
2.इन्वर्टर(inverter) और ग्रिड चार्जर
3.कंट्रोल एल्गोरिथ्म

1.सोलर चार्ज कंट्रोलर(solar charger controller)


सोलर चार्ज कंट्रोलर सोलर पीसीयू के अंदर लगा होता है।सोलर चार्ज कंट्रोलर का काम यह होता है कि दिन में सोलर पैनल से जो डीसी पॉवर जनरेट होती है तो उस डीसी पॉवर को पहले सोलर चार्ज कंट्रोलर से होकर गुजरना पड़ता है।सोलर चार्ज कंट्रोलर सोलर पैनल से आने वाले अधिकतम वोल्टेज को कंट्रोल करके हमारी बैटरी को चार्ज करता है।जिससे हमारी बैटरी हीट नही होती है और बैटरी अधिक समय तक चलती है।सोलर चार्ज कंट्रोलर भी 2 प्रकार के आते हैं एक पुरानी टेक्नोलॉजी वाला PWM सोलर चार्ज कंट्रोलर और नई टेक्नोलॉजी वाला MPPT सोलर चार्ज कंट्रोलर।

जैसा कि मैंने आपको ऊपर बताया था कि सोलर पीसीयू में नई टेक्नोलॉजी वाले MPPT वाले सोलर चार्ज कंट्रोलर लग कर आते हैं। PWM वाले सोलर इन्वर्टर सोलर पैनल से आने वाली पॉवर का पूरा यूज नही कर पाते हैं।अगर आप 1 किलोवाट सोलर पैनल के साथ PWM वाला सोलर इन्वर्टर लगवाते हैं तो जब सोलर पैनल से निलकलने वाली 1kw की डीसी पॉवर सोलर इन्वर्टर में लगे PWM सोलर चार्ज कंट्रोलर में पहुचेगी तो PWM सोलर चार्ज कंट्रोलर आपकी बैटरी तक 700 वाट सोलर पॉवर ही पहुंचा पाता है।वाकी 300 वॉट की डीसी सोलर पॉवर PWM सोलर चार्ज कंट्रोलर में ही खत्म हो जाती है।

वहीं अगर आप 1 किलोवाट सोलर पैनल के साथ MPPT सोलर पीसीयू लगवाते हैं तो आपके सोलर पैनल से आने वाली 1kw की पॉवर सोलर पीसीयू में लगे  MPPT सोलर चार्ज कंट्रोलर से होकर पूरी 1kw बैटरी तक पहुंचती हैं।MPPT सोलर चार्ज कंट्रोलर में सोलर पॉवर का लॉस नही होता है।इसलिए MPPT सोलर चार्ज कंट्रोलर की सोलर चार्जिंग क्षमता PWM सोलर चार्ज कंट्रोलर से 30% अधिक होती है।जिसके कारण MPPT सोलर चार्ज कंट्रोलर की कीमत अधिक होती है।

अगर आप छोटा सोलर पॉवर प्लांट लगा रहे हैं तो आप पीडब्लूएम वाले सोलर इन्वर्टर(PWM SOLAR INVERTER) खरीद सकते हैं।लेकिन यदि आप बड़ा सोलर प्लांट लगाने की सोच रहे हैं और आपका बजट अच्छा है तब एमपीपीटी वाले सोलर इन्वर्टर(MPPT SOLAR INVERTER) यानी सोलर पीसीयू ही लगवाएं।

इन्वर्टर और ग्रिड चार्जर

इन्वर्टर किसी भी सोलर इन्वर्टर का मुख्य भाग होता है।सोलर पीसीयू में इन्वर्टर टेक्नोलॉजी इसके अंदर ही फिट होती है।सोलर पीसीयू में इन्वर्टर का काम डीसी पॉवर को ऐसी पॉवर में और ऐसी पॉवर को डीसी पॉवर में कन्वर्ट करना होता है।साथ ही इसमें एक ग्रिड चार्जर लगा होता है जो सोलर एनर्जी के न होने पर ग्रिड से सप्लाई लेकर बैटरी बैंक को चार्ज करता है और साथ ही आपके लोड को चलाता है।ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम में बैटरी बैंक भी एक बहुत अहम हिस्सा होता है।जैसा की मैंने आपको ऊपर बताया था की सोलर पीसीयू ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम के साथ लगाया जाता है।सोलर पीसीयू सोलर पैनल या ग्रिड से मिलने बाली पॉवर पहले हमारी बैटरी बैंक को चार्ज करता है। जब ग्रिड से मिलने बाली पॉवर या सोलर पॉवर मौजूद नही होती है तो हमारा सोलर पीसीयू बैटरी बैंक में स्टोर डीसी पॉवर को ऐसी विधुत में कन्वर्ट करके हमारे सभी लोड को चलाता है।

3.कंट्रोल एल्गोरिथ्म(control algorithm)


सोलर pcu का यह भाग इसे नॉर्मल इन्वर्टर और सोलर चार्ज कंट्रोलर से अलग बनाता है।सोलर पीसीयू में कंट्रोल एल्गोरिथ्म को हम अपने हिसाब से सेट कर सकते हैं।सोलर पीसीयू को हम दो तरीके से ऑपरेट कर सकते हैं।पहला सोलर-बैटरी-ग्रिड और दूसरा सोलर-ग्रिड-बैटरी।सोलर पीसीयू को सोलर-बैटरी-ग्रिड पर सेट करने पर सोलर पैनल पहले हमारी बैटरी को चार्ज करता है।जब हमारी बैटरी फुल चार्ज हो जाती है फिर लोड बैटरी से रन होते हैं।जब बैटरी हमारी डिस्चार्ज होने लगती है तो हमारा लोड ग्रिड से चलने लगता है।और हमारी बैटरी सोलर पैनल से चार्ज होने लगती है।
यदि सोलर पैनल से जनरेट होने बाली पॉवर ज़ीरो है तो हमारी बैटरी ग्रिड से चार्ज होने लगती है और लोड भी ग्रिड से रन होने लगता है।जब बैटरी फुल चार्ज हो जाती है तो ग्रिड से मिलने बाली सप्लाई बंद हो जाती है।और हमारा लोड बैटरी से रन होने लगता है।यदि कभी सोलर पैनल से मिलने बाली पॉवर हमारे लोड को रन करने के लिये कम पड़ जाती है तो सोलर पीसीयू वाकी पॉवर ग्रिड से लेकर हमारे लोड को रन कर करने लगता है।यह सब सोलर पीसीयू में लगे कंट्रोल एल्गोरिथ्म की वजह से ही सम्भव होता है।

सोलर पीसीयू के फायदे(benefits of solar pcu)


#.सोलर पीसीयू बिजली के बिल को कम करता है। #.बार बार बिजली के काट ऑफ से छुटकारा दिलाता है। 
#.सोलर पीसीयू में एक डिजिटल स्क्रीन लगी होती है जो हमे ये दिखती है की बैटरी बैंक डिस्चार्ज हो गया है या बैटरी बैंक फुल चार्ज हो गया है,लोड सोलर से रन हो रहा है या ग्रिड पॉवर से रन हो रहा है,कितने वाट का लोड सोलर से रन हो रहा है और कितने वाट का लोड ग्रिड से रन हो रहा है आदि। 
#.सोलर एनर्जी न होने पर बैटरी बैंक में स्टोर पॉवर से हमारे लोड को रन करता है। 
#.सोलर पीसीयू को एंड्रॉइड एप की सहायता से कण्ट्रोल कर सकते हैं।
 #.ऑफ ग्रिड सिस्टम को गांव या शहर दोनों जगह इनस्टॉल कर सकते हैं।
 #.सोलर पीसीयू को इनस्टॉल करना बहूत सरल होता है। #.सोलर पीसीयू से हमारी बैटरी बैंक की लाइफ बढ़ जाती है। 
#.सोलर पीसीयू pwm और mppt टेक्नोलॉजी दोनों आते हैं। #.सोलर पीसीयू में कोई कमी आती है तो सिर्फ फ्यूज ही ख़राब होता है।जिसे हम अपने आप बदल सकते हैं।

सोलर पीसीयू और सोलर इन्वर्टर में क्या अंतर होता है?


सोलर इन्वर्टर-
  • सोलर इन्वर्टर भी सोलर पीसीयू की तरह पहेली प्राथमिकता सोलर चार्जिंग को देता है।पर सोलर इन्वर्टर,सोलर पॉवर और ग्रिड पॉवर(मैन सप्लाई) दोनों के उपस्थित होने पर हमारी बैटरी को केवल सोलर पॉवर से ही चार्ज करता है और हमारे मौजूद लोड को ग्रिड पॉवर से वाईपास मोड के द्वारा रन करता है।और जब ग्रिड सप्लाई चली जाती है तो हमारा सोलर इन्वर्टर बैटरी में स्टोर सोलर पॉवर से हमारे लोड को रन करने लगता है।मतलब की जब तक मैन सप्लाई बनी रहेती ही तब तक हमारा लोड केवल मैन सप्लाई द्वारा रन होता है और इस केस में सोलर इन्वर्टर हमारी बैटरी को केवल सोलर पॉवर से चार्ज करता है मैन सप्लाई से नही और जब मैन सप्लाई कट हो जाती है तो हमारा लोड बैटरी से रन होने लगता है।
  • यह आमतौर पर छोटे ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम में यूज होता है।
  • सोलर इन्वर्टर की कीमत सोलर पीसीयू से कम होती है।
  • सोलर इन्वर्टर अधिकतर 500kv से लेकर 1600 kva तक मिलते हैं।
सोलर पीसीयू -
  • सोलर पीसीयू भी पहली प्राथमिकता सोलर चार्जिंग को देता है।लेकिन सोलर पीसीयू,सोलर पॉवर और मैन पॉवर के उपस्थित होने पर पहले दोनों से हमारी बैटरी को चार्ज करता है और हमारे लोड को भी मैन पॉवर से रन करता है।और जब हमारी बैटरी अपने अधिकतम वोल्टेज 14.7 पर फुल चार्ज हो जाती है तो सोलर पीसीयू मैन सप्लाई को कट कर देता है।और हमारे पुरे लोड को हमारे बैटरी बैंक से रन करता है। जब हमारी बैटरी बैंक अपने न्यूनतम वोल्टेज12.7 पर डिस्चार्ज हो जाती है तो सोलर पीसीयू अपने आप मैन सप्लाई से बैटरी को चार्ज करने के साथ लोड को भी मैन सप्लाई से रन करने लगता है।
  • इस तरह यह सोलर पॉवर को पहले यूज करता है और मैन पॉवर को तब यूज करता है जब सोलर एनर्जी पूरी तरह खत्म हो जाती है।
  • यह आमतौर पर बड़े ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम में यूज होता है।
  • सोलर पीसीयू की कीमत सोलर इन्वर्टर से अधिक होती है।
  • सोलर पीसीयू अधिकतर 500kva से लेकर 10kva तक मिलते हैं।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें