भारत मे बिजली कैसे बनाई जाती है?भविष्य में कोयले की किल्लत से बिजली संकट से कैसे बचा जा सकता है?

भारत मे 70% बिजली थर्मल पॉवर प्लांट से बनाई जाती है और थर्मल पॉवर प्लांट कोयले से चलते हैं।वाकी 30% बिजली अन्य वैकल्पिक स्रोत जैसे हाइड्रो प्रोजेक्ट्स, विंड, सोलर एनर्जी, न्यूक्लियर सोर्स से 2 फीसदी और अन्य रिन्यूअल एनर्जी सोर्स से बिजली बनती है.अगर सोचिए कि कोयले से बिजली बनाने वाले थर्मल प्लांट के पास बिजली बनाने के लिए कोयले का स्टॉक खत्म हो जाये तो बिना बिजली के फैक्ट्रियां बंद हो जायेंगीं, आपका घर अंधेरा हो जाएगा, फ्रिज, एसी, पंखा, टीवी, मोबाइल सब बंद हो जाएंगे। बिजली से भागने वाली ट्रेनों और मेट्रो की रफ्तार पर ब्रेक लग जाएगी। पूरा उत्पादन सेक्टर- सीमेंट, स्टील, कंस्ट्रक्शन, सब बिना बिजली की प्रभावित हो जाएंगे। इस कारण आने वाले समय मे भारत मे बिजली का संकट गहरा सकता है।

चाइना के बाद भारत दुनिया में कोयला उत्पादक करने की लिस्ट में दूसरे नंबर पर है।भारत के पास 300 अरब टन का कोयला भंडार है. लेकिन फिर भी भारत में कुल 135 थर्मल पावर प्लांट्स के पास इस समय कोयले का स्टॉक पूरा नही पहुंच पा रहा है।NPP(National Power Portal) के अनुसार, भारत में इस समय प्रत्येक दिन एक लाख 66 हजार 107 मेगावाट बिजली की खपत है। इसमें 1.63 लाख मेगावाट विधुत सप्लाई हो रही है। इस तरह से हर दिन करीब 2700 मेगावाट की कमी हो रही है।इस साल कोयले की कमी के कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं-

थर्मल पॉवर प्लांट पर कोयले की कमी के प्रमुख कारण-


1- कोरोना के कहर के बाद लॉकडाउन खत्म होते ही पिछले कुछ माह में बिजली की खपत का तेजी से बढ़ जाना है।क्योंकि अचानक से फैक्टरियों में तेजी से प्रोडक्शन शुरू होने लगा इस कारण बिजली की डिमांड बढ़ गई है।

2.दूसरा कारण यह है कि इस बार कोरोना की सेकंड लहर के दौरान मजदूरों की अनुपस्थिति से कोयले के खनन का काम काफी प्रभावित हुआ है।

3. तीसरा कारण है कि इस साल अधिक बारिश के कारण खदानों में जलभराव होने की वजह से कोयले की निकासी नहीं हो पा रही है.अधिक जलभराव होने से कोयले का खनन कम हुआ।

4. चौथा कारण है कि भारत कोयले का आयात इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों से करता है। अंतरराष्ट्रीय मार्किट में कोयले के दाम में 40% की बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते भारतीय कंपनियों ने कोयले का इम्पोर्ट घटा दिया था।

5. पांचवा कारण है की हर घर बिजली सप्लाई करने का लक्ष्य, जिससे पहले के मुकाबले बिजली की मांग काफी बढ़ गई है.

6. छठवां कारण है कि कोयल का प्रबंधन भी एक बड़ी समस्‍या है. इसके अलावा कोयले के खनन करने के तरीके अभी तक आधुनिकारण नही हो पाए हैं।

कोयले से बिजली कैसे बनाई जाती है?

भारत मे बिजली बनाने के लिए सबसे ज्यादा कोयले का इस्तेमाल किया जाता है।वर्तमान में भरात में 70% बिजली कोयले से ही बनाई जाती है।देश मे कुल 135 थर्मल पॉवर प्लांट है जो पूरे देश की बिजली की खपत की पूर्ति करते हैं।ये सभी थर्मल पॉवर प्लांट पूर्णता कोयले से चलते हैं। थर्मल पॉवर प्लांट में भट्टी होती हैं जिनमे कोयला पीसकर एक दम पाउडर बनाकर इनके अंदर जलाया जाता है और भट्टी के ऊपर वाष्पक या ब्वायलर (Boiler) लगे होते हैं जिनमे पानी भरा होता है।

कोयला जितना ज्यादा अच्छा होगा उससे उतनी ही ज्यादा उष्ण ऊर्जा(Heat Energy) पैदा होती है।भट्टी में बहुत मोटे मोटे पाइप लगे होते हैं जो भट्टी में घूमते रहते हैं जिनमे पानी भाप बनकर सीधे टर्बाइन में जाता है।इन मोटे पाइप का एक सिरा टर्बाइन से जुड़ा होता है जिसके कारण भाप की ऊर्जा से टर्बाइन घूमने लगती है।टर्बाइन एक बड़ी गोलाकार चकरी नुमा होती है जिसमे बड़े बड़े ब्लेड लगे होते हैं।भाप की तेज गति से टरबाइन जोर जोर घूमने लगती है।भाप का दबाव जितना तेज होगा उतनी तेज से टर्बाइन घूमेगी और उतनी तेज गति से बिजली के तारों में ज्यादा बिजली बनेगी।

भविष्य में कोयले की किल्लत से बिजली संकट से कैसे बचा जा सकता है?


भविष्य में कोयले की किल्लत से बिजली संकट से बचने के लिए सरकार को भारत मे कोयले पर निर्भरता कम करनी होगी।दूसरा कोयले से बनी बिजली से हमारे वातावरण को बहुत नुकसान भी हो रहा है।जब कोयला जलता है तब इससे कई जहरीली गैसें भारी मात्रा में निकलती हैं जिसके कारण धरती का तापमान बढ़ रहा है,सूखा, बाढ़ जैसी आपदाएं बढ़ रही हैं।

आगे भविष्य को ध्यान में रखते हुए हमें ऊर्जा के दूसरे विकल्पों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, लेकिन ये यह एक-दो दिन में नहीं होगा. इसके लिए समय लगता है।एक मजबूत सोची समझी प्लानिंग और इरादों के साथ सरकार को कोयले पर निर्भरता घटाने के लिए आगे बढ़ना होगा. इसके लिए हमे साफ सुथरी और कम कार्बन उत्सर्जन वाले स्रोतों का इस्तेमाल करना होगा।इसके लिए सोलर पॉवर प्लांट,दूसरा हाइड्रो पॉवर, तीसरा न्यूक्लियर, चौथा बायो एनर्जी और पांचवा फ्यूल एनर्जी को बिजली की खपत को पूरा करने के लिए अधिक से अधिक उपयोग में लाना होगा।

1.सोलर एनर्जी: सरकार को रूफटॉप सोलर पॉवर प्लांट और कॉमर्शियल सोलर पॉवर प्लांट की तरफ ज्यादा जागरूक दिखानी पड़ेगी।सोलर पैनल से बनने वाली बिजली अन्य वैकल्पिक स्रोतों के मुकाबले सस्ती पड़ती है।साथ ही सोलर प्लांट से 0% कार्बन उत्सर्जन होता है जिससे हमारे वातावरण को कोई नुकसान नही पहुंचता है।

2.फ्यूल एनर्जी: वैसे तो फ्यूल एनर्जी खुद संकट में है और दिन पर दिन फ्यूल के दाम बढ़ते जा रहे हैं।इसलिए ये विकल्प बहुत महँगा है।

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40 वाट सोलर पैनल का काम,कीमत, स्पेसिफिकेशन।कंप्लीट 40 वाट सोलर पॉवर सिस्टम की कीमत?


40 वाट सोलर पैनल(40 watt solar panel)


नमस्कार दोस्तों आज मै आपको 40 वाट सोलर पैनल के बारे में बताऊंगा कि आखिर 40 वाट सोलर पैनल(40 watt solar panel) का क्या होता है इससे क्या काम हो सकते हैं इसकी कीमत क्या होती है आदि के बारे में ।मैंने अपनी पिछली पोस्ट में आपको 3 वाट सोलर पैनल और 5 वाट सोलर पैनल के बारे में बताया था की इससे क्या काम हो सकता है आदि। 

मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य यही है कि मै लोगों को सोलर एनर्जी के प्रति जागरूक कर सकूँ उन्हें सोलर से जुडी हर एक छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी जानकारी दे सकूँ।जिससे सभी लोग सोलर एनर्जी का उपयोग करें और अपने पर्यावरण को खतरे में जाने से बचाएं।इसके अलावा आप सोलर का यूज करके अपने पैसों की भी बचत कर सकते हैं ।सोलर एनर्जी एक फ्री माध्यम है बिजली बनाने का जिसका फायदा उठा कर आप बिजली की झंझट से छुटकारा पा सकते हैं। दुनिया में ऐसी कई जगह हैं जहां बिजली नही पहुँच सकती है या वहां बिजली नही है। वहां के लिये सौर ऊर्जा किसी वरदान से कम नही है।तो चलिये आज हम बात करते हैं 40 वाट सोलर पैनल के बारे में।

40 वाट सोलर पैनल की कीमत(40 Watt Solar Panel Price)


किसी भी अच्छी कंपनी का 40 वाट का सोलर पैनल आपको 1800 रूपये में मिल जायेगा और साथ में आपको इसकी 25 साल की वारण्टी भी मिलती है दरअसल सोलर पैनल कभी खराब ही नही होते हैं।

40 वाट सोलर पैनल का वोल्टेज और करेंट(40 Watt Solar Panel Voltage & current Output)-


40 वाट सोलर पैनल 12 वोल्ट में आते हैं और इनका अधिकतम वोल्टेज 17 होता है और यह 2 एम्पियर का करेंट प्रति घण्टा जनरेट कर सकते हैं।

40 वाट सोलर पैनल का काम से क्या क्या लोड चल सकता है?(40 watt solar panel load run)


40 वाट सोलर पैनल से आप 12volt, 20ah की बैटरी को दिन में फूल चार्ज कर सकते हैं।आप 40 वाट सोलर पैनल से दिन में डायरेक्ट 18 वाट का डीसी पंखा चला सकते हैं।साथ ही आप 40 वाट सोलर पैनल से 35 वॉट तक के छोटे डीसी पॉवर वाले विधुत उपकरण दिन में डायरेक्ट चला सकते हैं।

कैसे जाने की 40 वाट का सोलर पैनल किसी बैटरी को कितनी देर में चार्ज कर देगा-


पहले तो मैं आपको बता दूं कि अगर आपको यह जानना हो कि किस सोलर पैनल के साथ कितने एम्पियर वाली बैटरी लगानी चाहिए जिससे कि उस सोलर पैनल से वह बैटरी पूरे दिन में फुल चार्ज हो जाये।तो इसके लिए एक सीधा सा फार्मूला है आपको अपने सोलर पैनल के कुल वॉट से 2 का भाग करना है फिर जितना वाट निकल कर आता आपको उतने एम्पियर की बैटरी को इस पैनल के साथ जोड़नी चाहिए।जैसे अभी हमारा सोलर पैनल 40 वाट का है तो 40वाट  को जब हम 2 से भाग करेंगे तो 20 वाट निकलकर आयेगा।इसलिए हमें 40 वाट सोलर पैनल के साथ 20 एम्पियर की बैटरी लगानी चाहिए।


अब 40 वाट सोलर पैनल अच्छी धूप में 40 वाट प्रति घण्टा की पॉवर जनरेट करता है।अगर आपको पूरे दिन में 6 घण्टे की बढ़िया धूप मिल जाती है तब 40 वाट सोलर पैनल 6 घण्टे की धूप से कुल 40×6= 240वाट की बिजली उतपन्न कर देता है।इस प्रकार जब आप 40 वाट सोलर पैनल पर 12 वोल्ट 20 एम्पियर यानी 12×20=240 वाट की बैटरी जोड़ेंगे तब 40 वाट सोलर पैनल 240 वाट की बैटरी को 240/40= 6 घण्टे में फूल चार्ज कर देगा।अगर किसी दिन धूप अच्छी नही है बादल हैं तब 7-8 घण्टे भी बैटरी को फुल चार्ज करने में लग सकते हैं।

40 वाट सोलर पैनल काम कैसे करता है(How does 40 watt solar panels work)-


किसी सोलर पैनल से बिजली लेने के लिये हमे उसमे तार जोड़कर उसे धूप में रखना पड़ता है तब सोलर पैनल काम करता है और आप इसका लाभ उठा पाते हैं।क्योकि जब सोलर पैनल पर सूरज की किरणे पड़ती हैं तब सोलर पैनल पॉवर जनरेट करते हैं और इस पॉवर को हम बैटरी में स्टोर कर लेते है या सीधे इससे कोई उपकरण चला सकते हैं।

40 वाट सोलर पैनल में तार कैसे जोड़ते हैं(How connect wire in solar panel)-


सोलर पैनल में तार जोड़ना बहूत सरल होता है इसे कोई अनपढ़ व्यक्ति भी आसानी से जोड़ सकता है।जब आप सोलर पैनल के पीछे लगी काले प्लास्टिक के बॉक्स को खोलेंगे तो उसमे आपको दो पॉजिटिव(+) और निगेटिव(-) के निशान दिखेंगे आपको पॉजिटिव बाले निशान पर एक कलर का तार बांधना और नेगेटिव बाले निशान पर दूसरे कलर का तार बांधना है ।सोलर पैनल में तार हमेशा कॉपर का ही बांधना चाहिए इससे सोलर पैनल से करेंट अच्छा निकलता है।

अब तार बाँधने के बाद आप उस तार को अपनी बैटरी से जोड़कर अपनी बैटरी चार्ज कर सकते हो या कोई उपकरण चला सकते हो। और बैटरी में तार ध्यान से जोड़े जो तार आपने पैनल के पॉजिटिव में जोड़ा है वही तार आप बैटरी के पॉजिटिव में जोड़ें।और दूसरा पैनल के नेगेटिव बाला बैटरी के निगेटिव में ।यदि आप उलटे तार लगा देंगे तो बैटरी चार्ज नही होगी।और इससे पैनल भी खराब हो सकता है।

सोलर चार्ज कंट्रोलर(Solar charge controller)-


ध्यान दें शाम को सोलर पैनल के तार बैटरी से हटा दे नही तो बैटरी का करेंट पैनल की तरफ वापस होने लगता है और बैटरी डिस्चार्ज होने लगती है ।यदि आप रोज तार नही हटा सकते हैं तो आपको सोलर चार्ज कंट्रोलर लगाना पड़ेगा सोलर चार्ज कंट्रोलर लगाने के लिये सोलर पैनल से आये दोनों तारों को पहले आपको सोलर चार्ज कंट्रोलर में जोड़ना पड़ेगा फिर उसके बाद सोलर चार्ज कंट्रोलर से दो तार आपकी बैटरी के पॉजिटिव और निगेटिव में जुड़ेंगे। इसे लगाने के बाद शाम को बैटरी डिस्चार्ज नही होती है।और आपको रोज रोज बैटरी से तार नही हटाने पड़ते हैं।मैंने अपनी पिछली पोस्ट में सोलर चार्ज कंट्रोलर के बारे में विस्तार से बताया है आप उसे जरूर पढ़ें।

कंप्लीट 40 वाट सोलर पॉवर सिस्टम की कीमत-


अगर आप 1 डीसी टेबल फैन और 2-3 led बल्ब और मोबाइल चार्ज करने के लिए सोलर सिस्टम लगवाना चाहते हैं तब 40 वाट सोलर सिस्टम आपके लोड को चलाने के लिए पर्याप्त है।40 वाट सोलर पॉवर सिस्टम को हम डीसी सोलर पॉवर सिस्टम भी बोल सकते हैं क्योंकि मिनी सोलर सिस्टम में इन्वर्टर और ग्रिड सप्लाई डिसकनेक्ट रहते हैं।इस प्रकार इस सोलर सिस्टम में सभी उपकरण डायरेक्ट सोलर पैनल और बैटरी से चलने वाले होते हैं जिन्हें हम डीसी पॉवर उपकरण बोलते हैं।आज के समय मार्केत में सीलिंग फैन,led बल्ब,मोबाइल चार्ज,टेबल फैन आदि बहुत से उपकरण डीसी सप्लाई से चलने वाले मिलते हैं।डीसी विधुत उपकरण बहुत कम बिजली की खपत करते हैं और इनकी लाइफ ऐसी विधुत उपकरणों से ज्यादा होती है।

40 वाट डीसी सोलर पॉवर सिस्टम किसके लिए उपयोगी है?


किसी भी सोलर प्लांट को लगाने से पहले आप अपनी जरूरत,अपना बजट,और आप जिस जगह पर रहते हैं वहां गर्मी ज्यादा पड़ती है या ठंड आदि इन सभी बातों का जरूर ध्यान में रख कर लगवाएं।अगर आप ऐसी जगह रहते हैं जहां लाइट बिल्कुल भी नही आती है और आपको सिर्फ 1 पंखा, 2 बल्ब,मोबाइल चार्जिंग,FM आदि चलाना है तो आप 40 वाट सोलर सिस्टम लगवा सकते हैं।अगर आप ऐसी जगह रहते हैं जहां लाइट तो है मगर आपको लाइट का कनेक्शन नही लेना है और बस ये छोटे उपरोक्त उपकरण चलाने हैं तब आप ये 40 watt मिनी डीसी सोलर सिस्टम लगवा सकते हैं।आप किसी जंगल,या पहाड़ी क्षेत्र में रहते हैं तब भी यह 40 वाट डीसी सोलर सिस्टम आपके लिए बहुत उपयोगी है।



घर का सम्पूर्ण लोड चलाने के लिए सोलर पॉवर सिस्टम प्लांट की कीमत?

 घर के लिए कितने सोलर पैनल,इन्वर्टर और बैटरी की जरूरत पड़ती है

घर के लिए सोलर पॉवर सिस्टम की कीमत?(Solar power System Price for Home ?)

घर के लिए सोलर सिस्टम(solar system for home) की कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि आपके सोलर सिस्टम का प्रकार कौन सा है और आपको कितने वाट का सोलर सिस्टम लगवाना है और आपको किस कंपनी का सोलर प्लांट लगवाना है आदि।इसलिए घर के लिए अगर आप सोलर सिस्टम लगवाना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले अपनी जरूरत को समझना होगा आपको अपना घर का लोड कैलकुलेट करना होगा तब आप अपने लिए एक सही और अच्छा सोलर सिस्टम लगवा पाएंगे।

बिना लोड कैलकुलेट किये और बिना अपनी जरूरत को समझे बगैर सोलर सिस्टम लगवाने से आपको नुकसान हो सकता है।अगर आपकी जरूरत कम है और आप बड़ा सोलर पावर सिस्टम लगवा लेते हैं तो आपके पैसे भी ज्यादा जाएंगे और आपके सोलर सिस्टम(solar system) से बनने वाली बिजली भी बेकार जाएगी।
अगर आप छोटा सिस्टम लगवाते हैं तो आपको बाद में सही बैकउप भी नही मिलता है।इसलिए अपने लिए एक सही सोलर सिस्टम लगाने से पहले आप अपना लोड कैलकुलेट कर लें क्या आपको क्या क्या सोलर पॉवर सिस्टम प्लांट(solar system) से चलाना है। 

घर के लिए सोलर पॉवर सिस्टम लगवाने से पहले अपने घर का कुल लोड कैसे पता करें?(LOAD CALCULATION FOR SOLAR SYSTEM IN HINDI)


मैं आपको दो सरल तरीके बताता हूँ जिससे आप अपने घर का कुल लोड कैलकुलेट करके अपने लिए सही सोलर पावर सिस्टम (solar power system)का चुनाव कर सकते हैं।

पहला तरीका-आप अपने गरमियों के 1 महीने के बिजली का बिल लें और उसमें देखें की आपके 1 महीने की बिजली खपत कितने यूनिट है।फिर 1 दिन की कुल यूनिट खपत को निकालें।अब सोलर पावर सिस्टम(solar power system) की गणना करने के लिए अपने 1 दिन की कुल यूनिट खपत को पूरे दिन में मिलने बाली सौर ऊर्जा यानी सूर्य के प्रकाश से भाग दीजिये।अब जितनी वैल्यू निकले आपको उतने ही वाट का सोलर पावर सिस्टम अपने लिए लगवाना होगा। मान लीजिये आपके 1 महीने की कुल खपत 450 यूनिट है।इस हिसाब से आपके 1 दिन में 15 यूनिट(15 किलोवाट) बिजली की खपत करते हैं।

अब भारत मे हमें बढ़िया धूप 6 घण्टे 10 से 4 बजे तक हर दिन लगभग पूरे साल मिलती ही।इस हिसाब से सोलर पावर प्लांट की जरूरत=एक दिन में कुल बिजली खपत/पूरे दिन में मिलने बाली सूर्य ऊर्जा =15 किलोवाट(15000वाट)/6= 2500वाट इस हिसाब से अगर आप 2500 वाट(2.5kw) का सोलर पावर सिस्टम(solar power system) अपने घर पर लगवाएंगे तो यह आपके पूरे दिन की 15 किलोवाट बिजली खपत को सोलर सिस्टम से पूरा करेगा।इससे आपके बिजली के बिल में 90% की बचत होती है और आपको 25 साल तक मुफ्त बिजली मिलती है।

 दूसरा तरीका- अगर आपके पास बिजली का बिल नही है या आपके यहाँ अभी मीटर नही लगा है। इस कंडीशन में आप अपने लिए सोलर पावर सिस्टम(solar power system) का सही चुनाव करने के लिए आपको अपने सभी विधुत उपकरणों के एक दिन की कुल पावर खपत को अलग अलग निकलना है ।फिर सबको एक साथ जोड़ कर कुल पावर खपत को निकालना है।और इस कुल पावर खपत को पूरे दिन में मिलने बाली सौर ऊर्जा से भाग देना है।अब जो वैल्यू आएगी वह आपके कुल सोलर पावर सिस्टम(solar power system) की क्षमता होगी। जैसे आप एक 100 वाट का कलर टीवी 10 घण्टे चलाना चाहते हैं तो आपकी एक दिन में कुल पावर खपत होगी 10×100=1000 वाट(watt)। 5 एलईडी बल्ब 10 वाट के आप 10 घण्टे चलाना चाहते हैं तो आपकी एक दिन में कुल पावर खपत होगी 5×10×10=500 वाट आप 60 वाट के 4 सीलिंग फैन 20 घण्टे चलाना चाहते हैं तो आपकी एक दिन में कुल पावर खपत होगी 60×4×20=4800 वाट ऊपर सभी उपकरण को एक दिन में सौर ऊर्जा सिस्टम से चलाने के लिए मानी गयी अवधि के लिए आपको कुल 1000+500+4800=6300 वाट सोलर पॉवर सिस्टम(solar power system) की जरूरत पड़ेगी। 

 इस हिसाब से अगर आपको एक दिन में 6 घण्टे की बढ़िया धूप मिलती है तो आपको कुल 6300/5=1260 वाट लगभग 1.5 किलोवाट सोलर पावर सिस्टम की जरूरत पड़ेगी अपने उपरोक्त लोड 5 एलईडी बल्ब,े 4 सीलिंग फैन,1 कलर टीवी को सौर ऊर्जा से चलाने के लिए।इस तरह से भी आप अपने घर की कुल बिजली खपत को निकाल कर अपने लिए एक सही सोलर पावर सिस्टम(solar power system) लगवा सकते हैं। कौन सा विधुत उपकरण 1 घण्टे में कितने वॉट की पॉवर खपत करता है उसकी मैंने एक पूरी लिस्ट बनाई है नीचे देखें-

विधुत उपकरण और उनकी कुल बिजली खपत


Applianceswatt
led bulb0-10watt
FAN55-100watt
L.E.D T.V55-100watt
LAPTOP60watt
TRIMMER,ROUTER5-20watt
RO25watt
AIR COOLER150-250watt
WASHING MASHINE500-700watt
TUBRLIGHT40watt
PRINTER30watt
SCANNER20W
REFRIGERATOR100-400watt
IRON800-2000watt
AC1500-4000W
GEYSER1000-2000watt
HAIR DRYER800-1800watt
WATER ROD3000W
SUBMERSIBLE WATER PUMP700-1500watt
1-1.5 ton AIR CONDITIONER1300-1900watt


सोलर पॉवर सिस्टम(solar power system) के लिए सोलर पैनल का चुनाव कैसे करें?


 अब जब आप अपने घर का लोड कैलकुलेट कर लेते हैं कि हमें अपने घर के लिए इतने वाट का सोलर सिस्टम लगवाना है तब आपके सामने एक और सवाल आता है कि सोलर सिस्टम बनाने के लिए कौन सा सोलर पैनल(Solar panel) लगवाएं ,कौन सा इन्वर्टर लगवाएं और कौन सी बैटरी लगवाएं तो आपको मैं इन सबके बारे में भी नीचे बता देता हूँ। 

सोलर सिस्टम के लिए सोलर पैनल(Solar panel) का चुनाव कैसे करें? 


 सोलर पैनल आमतौर से 2 प्रकार के बाजार में बिकते है जिनमे पहला है मोनोक्रिस्टलाइन सोलर पैनल (Monocrystalline Sp) और दूसरा है पोलीक्रिस्टलाइन सोलर पैन(Polycrystalline Solar panel).अब दोनों के बारे में जानते हैं कि आपको कौन सा सोलर पैनल अपने सोलर पावर सिस्टम के लिए चाहिए।

 1.मोनोक्रिस्टलाइन सोलर पैनल(Monocrystalline Solar Panel)- अगर आप ऐसी जगह रहेते हैं जहाँ अधिकतर मौसम खराब रहता है या सूरज कम समय के लिए निकलता है।ऐसी जगह के लिए मोनोक्रिस्टलाइन सोलर पैनल (Monocrystalline Sp) सोलर पैनल को सोलर पावर सिस्टम के साथ लगाया है।क्योकि मोनोक्रिमोनोक्रिस्टलाइन सोलर पैनल कम धूप में भी अच्छा काम करते हैं।इन सोलर पैनल की कीमत पोलीक्रिस्टलाइन से ज्यादा होती है। 

 2.पोलीक्रिस्टलाइन सोलर पैनल (Polycrystalline Solar panel)- अगर आप ऐसी जगह रहेते हैं जहाँ अच्छी धूप बाला क्षेत्र है।ऐसी जगह के लिए पोलीक्रिस्टलाइन सोलर पैनल को आप सोलर पावर सिस्टम के साथ इंस्टाल कर सकते हैं।इनकी कीमत मोनो सोलर पैनल(Solar panel) से कम होती है। (अगर आपके घर का कुल लोड 1 किलोवाट का है तो आपको 1.25 किलोवाट सोलर पैनल इनस्टॉल करने चाहिए क्योंकि सोलर पैनल निकलने वाली सोलर पावर बैटरी तक पहुँचते- पहुचते 25% बेकार चली जाती है।)

सोलर सिस्टम(solar power system) के लिए सोलर इन्वर्टर का चुनाव कैसे करें?


 इन्वर्टर आपको अपने लोड के अनुसार खरीदना होगा ।माना आपका कुल लोड 1 kw है तो आपको 1250 va रेटिंग का इन्वर्टर खरीदना होगा ।क्योकि इन्वर्टर की जो काम करने की efficiency होती है वह उनके कुल रेटिंग से 80% होती हैं।इसलिए 1250 va की कुल efficiency 1250×0.8=1000watt. होती है।

सोलर सिस्टम(solar power system) के लिए सोलर बैटरी का चुनाव कैसे करें? 


बैटरी आपको अपने सोलर पैनल(Solar panel) की क्षमता के अनुसार खरीदनी होगी।आपको बता दें कि 100 वाट सोलर पैनल एक घण्टे में 5 एम्पियर(a) का करेंट जनरेट करता है।अगर आप 1000 वाट सोलर पैनल इंस्टॉल करते हैं तो 1000 वाट सोलर पैनल 1 घण्टे में 50 एम्पियर(a) का करेंट जनरेट करेंगे और 6 घण्टे की सौर ऊर्जा में 1000 वाट सोलर पैनल 300 एम्पियर का करेंट जनरेट करेगें।

अब इस करेंट को स्टोर करने के लिए हमें बैटरी बैंक की जरूरत पड़ेगी।जिससे शाम को सूरज डूबने के बाद हम अपना लोड बैटरी से रन कर सकें। कंपनियां अधिकतर ब 150 ah और 180 ah और 200 ah रेटिंग की बैटरी ही बनाती हैं ।जिनमे 150 ah बैटरी को ज्यादा घरों में लगाया जाता है।इसलिए हमें 300 एम्पियर करेंट को स्टोर करने के लिए 300÷150= 2 मतलब आपको 150 ah की 2 बैटरियों की जरूरत पड़ेगी। 

 भारत की टॉप 10 सोलर पैनल कंपनी कौन सी हैं(Top 10 Solar Panel Companies in India)-


 भारत मे बहूत सी अच्छी सोलर कंपनी हैं।जिनसे आप एक अच्छा सोलर सिस्टम खरीद सकते हैं पूरी वारण्टी के साथ।मैं आपको भारत की कुछ अच्छी सोलर कंपनियों के नाम बताता हूँ जिनसे आप बिना किसी चिंता के एक अच्छा सोलर सिस्टम खरीद सकते हैं।नीचे देखें-
  1. Luminous solar
  2. Sukam solar
  3. Waaree Solar
  4. Microtek solar
  5. Tata Solar
  6. Exide solar
  7. Jakson solar
  8. Vikram Solar
  9. Goldi Grewn Solar
  10. Adani Solar

घर के लिए सोलर पावर सिस्टम की कीमत(Solar power System price For Home)- 


यहाँ मैं आपको ऑफ-ग्रिड सोलर पॉवर सिस्टम की कीमत के बारे में बताऊंगा।क्योंकि ऑफ-ग्रिड सोलर पॉवर सिस्टम ज्यादा इनस्टॉल किये जाते हैं।एक ऑफ-ग्रिड सोलर पावर सिस्टम प्लांट सोलर पैनल(Solar panel),सोलर इन्वर्टर और बैटरी से बनता है।

भारत में सोलर पैनल व सौर ऊर्जा प्लेट की कीमत-


सोलर पैनल व सौर ऊर्जा प्लेट की कीमत कंपनी के ब्रांड,क्वालिटी,क्षमता ,संख्या,कंपनी के सर्विस पर निर्भर करती है।भारतीय बाजार में किसी भी अच्छी कंपनी जैसे LUMINOUS, WAAREE, TATA POWER, ADANI, VIKRAM SOLAR,PATANJALI SOLAR,GOLDI GREEN, MICROTEK,का सोलर पैनल व सौर ऊर्जा प्लेट आपको 30-40 रूपये वाट तक मिल जाएंगे।आपको 1000 वाट या एक किलोवाट(1 kw solar panel) सोलर पैनल खरीदने के लिए लगभग 1000 वाट×40=40000 रुपये एक बार खर्च करने पड़ेंगें।एक बार सोलर पैनल लगवाने के बाद आपको 25 साल तक मुफ्त बिजली मिलेगी।कंपनी सोलर पैनल(Solar panel) की 25 साल की वारण्टी देती है। 

150 ah सोलर बैटरी की कीमत


 क्योंकि आपकी कुल जरूरत 1000 वाट सोलर पैनल की है इसलिए आपको 1000 वाट सोलर पैनल से बनने बाली सोलर पावर को रात के लिए स्टोर करने के लिए आपको बैटरी बैंक की जरूरत पड़ेगी।एक 100 वाट का सोलर पैनल एक घण्टे में 5 a एम्पियर का करेंट निकालता है।इसलिए 1000 वाट सोलर पैनल 1 घण्टे में कुल 1000×5÷100=50 ah एम्पियर का करेंट निकालेंगे और 6 घण्टे में 300 a एम्पियर का करेंट निकाल देंगे।अब आमतौर पर बैटरियां 12 वोल्ट 100 ah,12 volt 150 ah,12 volt 180 ah में आती हैं।इसलिए हमें पूरे दिन में 300 a का करेंट स्टोर करने के लिए 150 ah की दो बैटरी यूज करनी पड़ेंगी।

अगर आपके पास 150 ah की 2 बैटरी हैं तो आप उसी पर अपने 1000 वाट सोलर पैनल को जोड़ सकते हैं।अगर नही तो आप बाजार से Luminous, sukam, किसी भी अच्छी कंपनी की 150 ah की सोलर बैटरी खरीद सकते हैं।सोलर बैटरी 5 साल की वारण्टी में आती हैं।150 ah की ट्यूबलर सोलर बैटरी आपको लगभग 12500 में 5 साल की वारण्टी के साथ मिल जाती है।

सोलर इन्वर्टर की कीमत


सोलर पैनल से निकलने वाला डीसी करेंट पहले सोलर इन्वर्टर में जाता है जिसमें एक सोलर चार्ज कंट्रोलर लगा होता है जिसके द्वारा हमारी बैटरी सोलर पैनल से चार्ज होती है।अब हमारी बैटरी बैंक में जमा डीसी सोलर पावर को ऐसी पावर में बदलने के लिए सोलर इन्वर्टर में एक कनवर्टर होता है जो बैटरी से डीसी पावर लेकर उसे ऐसी पावर में बदलता है।सोलर इन्वर्टर में रेगुलर इन्वर्टर की तरह ग्रिड चार्जर भी होता है जिसके द्वारा हम अपनी बैटरी को ग्रिड सप्लाई से भी चार्ज कर सकते हैं। क्योकि आपके पास 1000 वाट सोलर पैनल और दो 150ah को बैटरी हैं।इसलिए आपको लगभग 1 किलोवाट और 2 बैटरी वाला सोलर इन्वर्टर खरीदना होगा।यहाँ मै आपको 500 वाट सोलर इन्वर्टर से लेकर 20 किलोवाट सोलर इन्वर्टर के प्राइज बता रहा हूँ।नीचे दिए गए प्राइज लिस्ट साल 2020 के 
अनुसार हैं इनकी कीमते समय समय पर घटती बढ़ती रहती हैं।

  CapacityPrice 
  •  12V ,650 VA। 5000(लगभग)
  •  12 V, 850 VA 5500(लगभग) 
  •  12 V, 1000VA. 6000(लगभग) 
  •  24 V,1450 VA. 8000(लगभग) 
  •  24 V, 2000 VA. 11,000(लगभग)
  •  36V, 2.75 KVA. 18,000(लगभग) 
  •  48V, 2.75 KVA. 18,000(लगभग)
  •  48V, 3.75 KVA. 22,000(लगभग) 
  •  48V,5.2 KVA. 38,500(लगभग)
  •  96V, 5.2 KVA. 38,500(लगभग)
  •  120V,7.5KVA. 52,500(लगभग) 
  •  120V, 10 KVA. 62,500 (लगभग)
  •  180V,10 KVA. 72,000(लगभग) 
  •  192V,12 KVA 85,500 (लगभग) 
  •  240V, 15 KVA. 1,00000(लगभग)
  •  360V, 20 KVA. 1,40,000(लगभग) 

 इसलिए आपको 1किलोवाट सोलर पावर सिस्टम(1 kw solar power system) लगवाने के लिए लगभग 40000+25000+6000+2500(तार, स्टैंड,फीटिंग) =73500 रुपये खर्च करने पड़ेंगे।सरकार सोलर पावर सिस्टम लगवाने पर 30% की सब्सिडी भी देती है।

इसी तरह आप अपने घर ,आफिस,दुकान आदि के पूरे दिन की बिजली खपत को निकाल कर अपने लिए सोलर पावर सिस्टम लगवाएं और सूर्य की शक्ति का फायदा उठाएं जो के दम फ्री है।आप जिस भी कंपनी से सोलर पॉवर सिस्टम(solar power system) खरीदेंगे वह आपको आपके लोड के अनुसार एक सही सोलर पॉवर सिस्टम का आपके लिए चुनाव करेगा।अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगे तो आप इस पोस्ट को जरूर शेयर करें।और मुझसे सबाल या सुझाव देने के लिए मुझे नीचे कमेन्ट करें।

अगर आपको ऊपर दी गई जानकारी अच्छी लगी हो तो हमें कमेंट बॉक्स में नीचे बताएं.


2 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट कीमत,प्रकार,सब्सिडी, स्पेसिफिकेशन और क्या क्या लोड कितनी देर चल सकता है?

नमस्कार मैं हूँ आकाश गुप्ता। आपका solarpanellagao.com में स्वागत है।मैंने पिछली पोस्ट में 1 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट के बारे में विस्तार से बताया था।आज मैं आपको 2 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट के बारे में विस्तार से जानकारी दूंगा।

2 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट के बारे में जानकारी(About 2 kilowatt Solar power plant in hindi)


अगर आपके घर का लोड 1600 वाट तक का है तब आपके लिए 2 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट उपयोगी रहेगा।2 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट पूरे दिन में औसतन 10 यूनिट बिजली उतपन्न कर देता है।2 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट से आप अपने घर के साधरण लोड जैसे 8 एलईडी बल्ब,3 पंखे,1 फ्रिज,1 कूलर आराम से चला सकते हैं।2 किलोवाट सोलर पैनल को लगाने के लिए आपको छाया मुक्त 200 स्क्वायर फिट जगह की जरूरत पड़ती है।नीचे 2 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट के प्रकार,ब्रांड,नवीनतम कीमत,स्पेसिफिकेशन के बारे में जानिए।

2 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट के प्रकार(Types Of 2 kilowatt solar power plant in Hindi)-


जैसा कि मैंने अपनी सोलर सिस्टम के प्रकार वाली पोस्ट में बताया था कि सोलर पॉवर प्लांट सिस्टम मुख्य तीन प्रकार के होते हैं-

1.ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम ।(Off grid solar system)

2.ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम ।( On grid Or Grid tie solar system)

3.हाइब्रिड सोलर सिस्टम(Hybrid solar system)

2 किलोवॉट ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम (2 Kilowatt Off grid solar system)


ऑफ-ग्रिड सोलर प्लांट को हम सोलर बैटरी सिस्टम भी बोलते हैं।एक ऑफ-ग्रिड सोलर प्लांट मुख्यता तीन भागों से मिलकर बनता है 1.सोलर पैनल 2.सोलर बैटरी 3.सोलर इन्वर्टर।ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम दिन में आपके घर के लोड को पहले सोलर पैनल से चलाता है और साथ मे सोलर पैनल से उपयोग न हो रही शेष ऊर्जा से आपकी बैटरी को भी चार्ज करता है।2 किलोवाट सोलर प्लांट में लगे सोलर पैनल अच्छी धूप में 1 घण्टे में 2 किलोवाट की बिजली बनाते हैं।

अगर आपका लोड किसी समय 1500 वाट का है तब यह सोलर प्लांट 1500 वाट सोलर पॉवर यूज करके आपके लोड को चलाएगा।और बचे हुए 500 वाट सोलर पॉवर से आपकी बैटरी चार्ज करेगा।अब अगर किसी समय सूरज ना होने पर या सार्वजनिक ग्रिड पॉवर उपलब्ध ना होने पर आप अपने घर के लोड को बैटरी में जमा सोलर पॉवर से चला सकते हैं।और अगर दिन के किसी समय बादल होने पर 2 किलोवाट सोलर पैनल से 1किलोवाट(1000 वाट) की ही बिजली बन रही है और आपका लोड 1500 वाट का है तब ऐसी स्थिति में ऑफ ग्रिड सोलर प्लांट सोलर पैनल और सोलर बैटरी दोनों से आपके लोड को चलाने में मदद करता है।इस कंडीशन में आपकी बैटरी भी धीरे धीरे डिस्चार्ज होने लगेगी क्योंकि सोलर पैनल से मिलने वाला पॉवर लोड चलाने के लिए काफी नही है।

ऐसे में आप ऑफ ग्रिड सोलर प्लान्ट में लगे स्मार्ट सोलर इन्वर्टर द्वारा अपनी बैटरी को डिस्चार्ज मोड पर रिजर्व पॉवर पर सेट कर सकते हैं।रिजर्व पॉवर का मतलब हुआ कि अगर आपकी बैटरी 50% डिस्चार्ज लेवल तक पहुंच जाएगी तब आपके लोड सार्वजनिक ग्रिड पॉवर से चलने लगेंगे और साथ मे आपकी बैटरी भी ग्रिड पॉवर और सोलर पैनल से चार्ज होने लगेगी।अगर आपके यहाँ सरकारी बिजली ज्यादा कट ऑफ होती है तब आप बैटरी की रिजर्व पॉवर 70% तक सेट कर सकते हैं जिससे कि सोलर पॉवर और सरकारी बिजली ना होने पर आपके घर के जरूरी उपकरण बैटरी बैंक से चल सकें।

अब आप समझ गए होंगे कि ऑफ ग्रिड सोलर पॉवर सिस्टम आपके लोड को चलाने के लिए पहेली प्राथमिकता सोलर पॉवर को देता है जिससे कि आप सरकारी बिजली का कम उपयोग करके अपने पैसों की बचत कर सकें और आपको 24 घण्टे मुफ्त में बिजली मिल सके।इसलिये ऑफ-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट को ही अधिक से अधिक घरों में लगया जाता है।

2 किलोवॉट ऑफ ग्रिड सोलर प्लांट स्पेसिफिकेशन (2 Kilowatt Off grid solar plant specifications)


2 किलोवॉट ऑफ ग्रिड सोलर प्लांट की स्पेसिफिकेशन के बात करें तो 2 किलोवॉट ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम इंस्टॉलेशन के लिए 250 वॉट के 8 सोलर पैनल या 335 वॉट के 6 सोलर पैनल,सोलर पैनल लगाने के लिए 200 वर्ग स्क्वायर फिट की छाया मुक्त जगह, एक 2 किलोवाट का ऑफ-ग्रिड MPPT टेक्नोलॉजी वाला सोलर इन्वर्टर जिसका अधिकतम डीसी इनपुट 2 किलोवाट होता है,12 वोल्ट 150 ah की 4 टॉल ट्यूबलर सोलर बैटरी ,2 किलोवॉट सोलर पैनल छत पर फिट करने के लिए GI स्ट्रक्चर ,और अन्य जरूरी छोटे छोटे उपकरण जैसे जंक्शन बॉक्स, एसी और डीसी केबल, फास्टनरों, केबल टाई, क्रिम्पिंग टूल, अर्थिंग किट, लाइटिंग अरेस्टर आदि की जरूरत पड़ती है।

2 किलोवॉट ऑफ ग्रिड सोलर प्लांट की कीमत(2 Kilowatt Off grid solar plant price)


2 किलोवॉट ऑफ ग्रिड सोलर प्लांट की कुल कीमत 1,60,000 रुपये होती है।जिसमे सोलर पैनल,सोलर बैटरी,सोलर इन्वर्टर और अन्य सहायक उपकरण की कीमतें शामिल हैं।

2 किलोवॉट ऑफ ग्रिड सोलर प्लांट की वारन्टी(Warranty of 2 kilowatt off grid solar plant warranty)


कम्प्लीट 2 किलोवॉट ऑफ ग्रिड सोलर प्लांट की 5 साल की वारन्टी कंपनियां देती हैं।और सोलर की 25 साल की वारन्टी मिलती है।

सोलर नेट मीटिरिंग-


2 किलोवॉट ऑफ ग्रिड सोलर प्लांट पर नेट मीटरिंग की सुविधा लागू नही है।

2 किलोवॉट ऑफ ग्रिड सोलर प्लांट से क्या क्या लोड और कितनी देर चलेगा(what appliances can run from 2kw solar plant in hindi)-


2 किलोवॉट ऑफ ग्रिड सोलर प्लांट से आप टीवी, पंखा, कूलर,फ्रिज,led बल्ब,0.5 टन इन्वर्टर ऐसी जैसे उपकरण बिना सार्वजनिक ग्रिड पॉवर के सोलर पॉवर से चला सकते हैं।अगर आप 2 किलोवॉट ऑफ ग्रिड सोलर प्लांट पर अगर 1600 वॉट का लोड एक साथ डालेंगे तब आपको इससे 4 घण्टे का बैकअप मिलेगा।अगर आप 2 किलोवॉट ऑफ ग्रिड सोलर प्लांट पर 1200 वाट का लोड डालेंगे तब यह 6 घण्टे तक आपके कनेक्टेड लोड को चला सकेगा।अगर आप 2 किलोवॉट ऑफ ग्रिड सोलर प्लांट पर 700 वाट का लोड डालेंगे तब यह 12 घण्टे तक आपके कनेक्टेड लोड को चला सकेगा।

1 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट कीमत,प्रकार,सब्सिडी, स्पेसिफिकेशन और क्या क्या लोड कितनी देर चल सकता है?

1 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट कीमत,प्रकार,सब्सिडी, स्पेसिफिकेशन और क्या क्या लोड कितनी देर चलेगा?

नमस्कार दोस्तों आपका solarpanellagao. com सौर ऊर्जा हिंदी ब्लॉग में आपका स्वागत है।आज मैं आपको इस पोस्ट में बताऊंगा की 1 किलोवाट सोलर पैनल पॉवर प्लांट(1 Kilowatt Solar Power plant price) को लगाने के लिए आपको कितने पैसे खर्च करने पड़ेंगे और 1 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट से आपके घर मे क्या क्या चल सकता है।तो चलिये जानते हैं 1 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट के बारे में सबकुछ।

1 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट की पूरी जानकारी-


दोस्तों किसी भी सोलर पॉवर प्लांट या सोलर पॉवर सिस्टम की कीमत उसके प्रकार और ब्रांड के आधार पर तय होती है।1 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट(1 Kilowatt Solar Power plant) या सोलर पॉवर सिस्टम के भी तीन प्रकार(टाइप) होते हैं।जैसे-1.ऑफ-ग्रिड सोलर पॉवर सिस्टम 2.ऑन-ग्रिड सोलर पॉवर सिस्टम 3. हाइब्रिड सोलर पॉवर सिस्टम।जहाँ जिसको जैसी जरूरत होती है वहाँ पर उसी प्रकार का सोलर पॉवर प्लांट इंस्टाल किया जाता है।किसी भी सोलर प्लांट का पहला काम सौर ऊर्जा को बिधुत ऊर्जा में बदलकर आपके घर के लोड को चलाना है और दूसरा सार्वजनिक पॉवर ग्रिड को सोलर पॉवर सप्लाई करना या शेष सोलर पॉवर से बैटरी को चार्ज करना होता है।

1 किलोवाट ऑफ-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट(1 Kilowatt Off-Grid Solar Power plant)


अगर आपके घर का लोड 800 वाट तक का है तभी आपको 1 किलोवॉट का सोलर प्लांट लगवाना चाहिए।अब बात करते हैं 1 किलोवाट ऑफ-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट के बारे में तो 1 किलोवाट ऑफ-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट के मुख्य तीन भाग होते हैं-1 किलोवाट सोलर पैनल 2. 1 किलोवाट सोलर इन्वर्टर 3. 12 वोल्ट,150 AH की 2 सोलर बैटरी।आपको बता दें कि ऑफ-ग्रिड सोलर प्लांट को सोलर बैटरी सिस्टम के रूप में जाना जाता है।ऑफ-ग्रिड सोलर प्लांट में पॉवर बैकअप के लिए बैटरी लगी होती हैं।रात में सोलर या ग्रिड सप्लाई ना मिलने पर आपका लोड बैटरी में जमा सोलर पॉवर से चलने लगता है।

बड़े मेट्रो शहरों को छोड़ कर भारत के अधिकतर शहरों,कस्बों आदि में बार-बार पॉवर कट की बहूत समस्या रहती है।इसलिए ऑफ-ग्रिड सोलर प्लांट को ही अधिकतर घरों में लगाया जाता है।जिससे कि सौर ऊर्जा और लाइट दोनों की अनुपस्थिति में आपके घर के लोड बैटरी से चलने लगें।

1 किलोवाट ऑफ-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट स्पेसिफिकेशन-


1 किलोवाट ऑफ-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट(1 Kilowatt Solar Power plant) के स्पेसिफिकेशन की बात करें तो 1 किलोवाट ऑफ-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट इंस्टाल करने के लिए 250 वाट के 4 सोलर पैनल (250×4=1000 वाट), 1 किलोवाट का ऑफ-ग्रिड सोलर इन्वर्टर,12 वोल्ट 150 ah की 2 बैटरी(150ah×2), 2 जोड़ी MC4 कनेक्टर,30 मीटर की कॉपर की डीसी केवल,20 मीटर ऐसी केवल,100 वर्ग फिट खाली जगह,1 किलोवाट सोलर पैनल को छत पर फिट करने के लिए सोलर स्ट्रक्चर।

1 किलोवाट ऑफ-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट की कीमत(1 Kilowatt Off-Grid Solar Power plant price)


1 किलोवाट ऑफ-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट की कुल कीमत 80,000 रुपये है।इसमें सोलर पैनल,सोलर इन्वर्टर,सोलर बैटरी,तार,पैनल स्ट्रक्चर,की कीमतें शामिल हैं।

1 किलोवाट ऑफ-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट की वारन्टी और सरकारी सब्सिडी(1 Kilowatt Off-Grid Solar Power plant Warranty and Subsidy)-


सब्सिडी की बात करें तो ऑफ-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट पर कोई सब्सिडी नही मिलती है।वारन्टी की बात करें तो इस 1 किलोवाट ऑफ-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट में आपको सोलर पैनल की 25 साल की वारन्टी मिलती है,बैटरी की 5 साल की वारन्टी मिलती है और सोलर इन्वर्टर की 5 साल की वारन्टी मिलती है।

1 किलोवाट ऑफ-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट से क्या क्या चल सकता है-


4 एलईडी लाइट,1 टीवी,1 फ्रिज,3 पंखे ये सब एक साथ लगतार करीब 800 वाट का लोड 4 से 5 घण्टे तक आराम से चला सकते हैं।वाकी आपके लोड पर निर्भर करता है कि आप कितने वाट के उपकरण कब और किस समय चलाते हैं।यह समय कम या ज्यादा भी हो सकता है।बस यह ध्यान रखिएगा की आपका लोड 800 वाट से ज्यादा ना हो।अगर किसी समय सोलर पैनल आपके सिस्टम से जुड़े हुए लोड को चलाने में असमर्थ होता है तो बैटरी आपके लोड को चलाने में आपकी हेल्प करेगी।

1 किलोवाट ऑफ-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट एक दिन में कितने यूनिट बिजली प्रति दिन बना सकता है?


भारत की बात करें तो यहाँ 365 दिन में से 300 दिन सूरज के दर्शन होते हैं।गर्मियों के दिनों में सुबह 8 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक बढ़िया धूप रहती है।वहीं सर्दियों के दिनों में सुबह 10 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक बढ़िया धूप मिल पाती है।इस प्रकार अगर हम पूरे साल की कुल एवरेज धूप मिलने की बात करें तो हमें 1 दिन में 5 घण्टे की बढ़िया धूप मिलती है।इस प्रकार अगर आपका 1 किलोवाट का सोलर पॉवर प्लांट है तो 1 किलोवाट सोलर प्लांट(1KiloWatt Solar Plant) 1 दिन में 5 घण्टे(Hour) की बढ़िया धूप में 1KW×5H= 5KWH यानी 5 यूनिट की बिजली बना सकता है।और 1 माह में 30×5KWH= 150KWH की बिजली बनाएगा।


1 किलोवाट ऑन-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट(1 kilowatt On-Grid Solar power plant)


ऑन ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट के मुख्य भाग सोलर पैनल,एमपीपीटी सोलर इन्वर्टर और नेट मीटर होते हैं।ऑन ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट में बैटरियों को नही लगाया जाता है।इसलिए ऑन ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट को ऐसी जगह लगाया जाता है जहां बिजली 24 घण्टे उपलब्ध रहती है।ऐसी जगह पर जहां बिजली 24 घण्टे रहती हैं वहां पर ऑन ग्रिड सोलर प्लांट को बिजली के बिल को कम करने के लिए लगाया जाता है।ऑन ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट को ग्रिड टाई सोलर प्लांट भी कहा जाता है क्योंकि ऑन ग्रिड सोलर प्लांट सीधे सार्वजनिक सरकारी ग्रिड बिजली के साथ जुड़े हुए होते हैं।ऑन ग्रिड सोलर प्लांट से बनने वाली बिजली को आप नेट मीटर द्वारा सरकार को बेच भी सकते हैं।

नेट मीटर एक सोलर उपकरण होता है जो सोलर प्लांट से बनने वाली बिजली को सार्वजनिक ग्रिड पॉवर में भेजने की अनुमति देता है।1 किलोवाट सोलर प्लांट पूरे दिन में लगभग 5 यूनिट बिजली बना देता है।अगर आप सोलर प्लांट से बनने वाली बिजली को खर्च नही करते हैं तब यह सोलर विधुत नेट मीटर के माध्यम से ग्रिड को सप्लाई कर दी जाती है।आपके सोलर प्लांट से जितनी बिजली सरकारी ग्रिड को जाएगी उतनी बिजली आपके नेट मीटर में फीड हो जाएगी।सोलर प्लांट से बनने वाली बिजली को सरकार या प्राइवेट बिजली कंपनी 10 रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीदती हैं।आपके सोलर प्लांट से एक माह में जितने यूनिट बिजली सार्वजनिक ग्रिड को जाएगी आप उसका बिजली कंपनी से पैसा ले सकते हैं या उसे अपने अगले बिजली बिल में एडजस्ट करवा सकते हैं।

1 किलोवाट ऑन-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट स्पेसिफिकेशन(1 kilowatt On-Grid Solar power plant Specifications)


1 किलोवाट ऑन-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट के स्पेसिफिकेशन की बात करें तो 1 किलोवाट ऑन-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट इंस्टाल करने के लिए 250 वाट के 4 सोलर पैनल,1 किलोवाट ऑन ग्रिड सोलर इन्वर्टर,1000 वर्ग फ़ीट की जगह,2 जोड़ी MC4 कनेक्टर, 1 किलोवाट सोलर स्ट्रक्चर,कॉपर डीसी केबल 30 मीटर,ऐसी केबल 20 मीटर, छत पर 1 किलोवाट सोलर पैनल फिट करने के लिए GI सोलर पैनल स्ट्रक्चर

1 किलोवाट ऑन-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट की कीमत(1 kilowatt On-Grid Solar power plant price)


1 किलोवाट ऑन-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट की कीमत 65000 रुपये होती है।इसमें सोलर पैनल,सोलर इन्वर्टर,नेट मीटर,तार,पैनल स्ट्रक्चर,की कीमतें शामिल हैं।ऑन ग्रिड सोलर प्लांट की कीमत ऑफ ग्रिड सोलर प्लांट से कम होती है।

1 किलोवाट ऑन-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट की वारन्टी और सरकारी सब्सिडी

कंपनी पूरे 1 किलोवाट ऑन-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट की 5 साल की वारन्टी देती हैं और सोलर पैनल के लिए 25 साल की वारन्टी होती है।ऑन-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट पर राज्य सरकारें 30% तक सब्सिडी देती हैं।

सोलर नेट मीटरिंग: 


आप सभी क्षमता के ऑन-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट पर नेट मीटर लगा सकते हैं।लेकिन ऑफ ग्रिड सोलर प्लांट पर नेट मीटर लागू नही होता है।

1 किलोवाट हाईब्रिड सोलर पॉवर प्लांट(1 kilowatt Hybrid Solar power plant)


हाईब्रिड सोलर पॉवर प्लांट ऑफ-ग्रिड और ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम दोनों का जोड़ होता है। हाईब्रिड सोलर पॉवर प्लांट को उन लोगो को लगाने के लिए कहा जाता है जो सार्वजनिक ग्रिड बिजली के बार बार कट-ऑफ से परेशान हैं और सोलर प्लांट से बनने वाली शेष अतिरिक्त बिजली को सरकारी ग्रिड में भी सप्लाई देना चाहते हैं।जिससे कि वह जितनी सौर बिजली सरकारी ग्रिड को दें उसका समायोजन उनके अगले बिजली के बिल में किया जा सके।हाईब्रिड सोलर पॉवर प्लांट के मुख्य भाग में सोलर पैनल,हाइब्रिड सोलर इन्वर्टर,सोलर बैटरी,और नेट मीटरिंग शामिल हैं।हाईब्रिड सोलर पॉवर प्लांट लगाने के बाद आपके घर का लोड चलाने के लिए इसके तीन स्रोत हैं-सोलर पैनल,सोलर बैटरी,और सार्वजनिक ग्रिड पॉवर।

1 किलोवाट हाईब्रिड सोलर पॉवर प्लांट स्पेसिफिकेशन(1 kilowatt Hybrid Solar power plant Specifications)


1 किलोवाट हाईब्रिड सोलर पॉवर प्लांट स्पेसिफिकेशन की बात करें तो 1 किलोवाट हाईब्रिड सोलर पॉवर प्लांट लगाने के लिए आपको 250 वाट के 4 पैनल(250×4=1000 वाट),1 किलोवाट का MPPT टेक्नोलॉजी वाला हाइब्रिड सोलर इन्वर्टर,12 वोल्ट 150 ah की 2 टॉल ट्यूबलर सोलर बैटरी,1000 sq. ft. की जगह और सभी जरूरी सामान जैसे कॉपर तार,mc4 कनेक्टर,सोलर पैनल स्टैंड आदि।

1 किलोवाट हाईब्रिड सोलर पॉवर प्लांट की वारन्टी(1 kilowatt Hybrid Solar power plant Warranty)

पूरे 1 किलोवाट हाईब्रिड सोलर पॉवर प्लांट की 5 साल की वारन्टी मिलती है।जिसमे सोलर पैनल की 25 साल की वारन्टी अतिरिक्त मिलती है।

1 किलोवाट हाईब्रिड सोलर पॉवर प्लांट पर सब्सिडी और सोलर नेट मिटिरिंग 

1 किलोवाट हाईब्रिड सोलर पॉवर प्लांट और 1 किलोवाट ऑन-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट लगाने पर  सरकार 30% सब्सिडी देती है।और 1 किलोवाट हाईब्रिड सोलर पॉवर प्लांट पर नेट मीटिरिंग सुविधा लागू है।

1 किलोवाट हाइब्रिड सोलर पॉवर प्लांट से क्या क्या लोड और कितनी देर चलेगा?


अगर आप 1 किलोवाट हाइब्रिड सोलर पॉवर प्लांट से 800 वाट तक के विधुत घरेलू उपकरण एक साथ चलाते हैं तब आपको इस प्लांट से कुल 3 घण्टे का बैकउप मिलेगा।अगर आप इस प्लांट से 500 वाट तक के घरेलू उपकरण एक साथ चलाते हैं तब आपको इस 1 किलोवाट सोलर प्लांट से 5 घण्टे का बैकउप मिलेगा।आप इस प्लांट से टीवी, फ्रिज,कूलर,पंखा, एलईडी लाइट आदि 800 वाट रेंज के अंदर के सभी उपकरण आप इससे चला सकते हैं।



1 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट से जुड़े आमतौर पर पूछे जाने वाले सवाल

1 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट से जुड़े पूछे जाने वाले सवाल


मैंने आपको अपनी पीछली पोस्ट में 1 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट कीमत,प्रकार,सब्सिडी, स्पेसिफिकेशन और क्या क्या लोड कितनी देर चलेगा? के बारे में विस्तार से बताया था। आज मैं आपको इस पोस्ट में 1 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट से जुड़े आमतौर पर पूछे जाने वाले सवालों के बारे में बताउंगा।

1 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट से जुड़े पूछे जाने वाले सवाल(FAQS-1 kw solar power plant)


सवाल : 1 किलोवाट सोलर पैनल पॉवर प्लांट से क्या क्या चल सकता है?


उत्तर: 1 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट आपका 800 क्षमता वाट तक का लोड चला सकता है।आप इससे कुल मिलाकर 800 वाट क्षमता रेंज के विधुत उपकरण जैसे टीवी, फ्रिज, कूलर, एलईडी लाइट,पंखा,आदि जैसे बहुत से उपकरण चला सकते हैं।

सवाल: 1 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट की क्या कीमत होती है या 1 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट लगवाने में कितना खर्चा आता है?


उत्तर: 1 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट की कीमत इसके प्रकार पर निर्भर करती है।सभी प्रकार के 1 किलोवाट सोलर प्लांट की कीमत इस प्रकार है-

1 किलोवाट ऑन-ग्रिड सोलर प्लांट की कीमत
1KW On-Grid solar system Price- Rs.60000 /-

1 किलोवाट ऑफ-ग्रिड सोलर प्लांट की कीमत 1KW Off-Grid solar system Price
-Rs.60,000/-

1 किलोवाट हाइब्रिड सोलर प्लांट की कीमत
1KW hybrid solar system Price – Rs.80,000/-

सवाल: स्टैंड-अलोन पॉवर सिस्टम क्या होता है?


उत्तर: स्टैंड-अलोन पॉवर सिस्टम(stand-alone power system) ऑफ-ग्रिड सोलर पॉवर सिस्टम का दूसरा नाम होता है।ऑफ-ग्रिड सोलर पॉवर सिस्टम में अतिरिक्त बिजली को स्टोर करने के लिए सोलर बैटरी लगी होती हैं।

सवाल: किस प्रकार का सोलर पॉवर प्लांट मेरे घर के लिए अच्छा रहेगा?


उत्तर: सभी प्रकार के सोलर पॉवर प्लांट अपनी जगह पर अच्छे होते हैं।लेकिन अगर आप अपने घर के लिए सोलर पॉवर सिस्टम लगाना चाहते हैं तो आपके लिए ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम उपयोगी रहेगा।क्योंकि ऑफ-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट में बैटरी लगी होने के कारण यह सिस्टम आपको रात में और बादल के दिनों में आपको बैटरी में जमा अतिरिक्त सोलर पॉवर से आपको बैकअप देता रहेगा।

सवाल: ऑन-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट और ऑफ-ग्रिड सोलर प्लांट के बीच मुख्य क्या अंतर होता है?


उत्तर: ऑन-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट में सोलर पॉवर और ग्रिड पॉवर को स्टोर करने के लिए बैटरियां नही होती हैं।और वहीं ऑफ-ग्रिड सोलर पॉवर प्लांट में बैटरियां लगी होती हैं जिससे कि आपको रात में या बादलों के दिनों में बैटरी में जमा सोलर पॉवर से बैकअप मिलता रहता है।

सवाल: क्या 1 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट से 1 फ्रिज 5-6 घण्टे चला सकती है?


उत्तर: हाँ आप एक छोटी फ्रिज 1 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट से 5-6 घण्टे चला सकते हैं।

सवाल: 1 किलोवाट सोलर प्लांट में मुझे कितने सोलर पैनल लगाने पड़ेंगे?


उत्तर: सोलर पैनल की संख्या सोलर पैनल की क्षमता और उनके साइज पर निर्भर करती है।अगर आप 1 किलोवाट सोलर प्लांट में 250 वाट के सोलर पैनल लगा रहे हैं तब आपको 250 वाट के 4 सोलर पैनल लगाने पड़ेंगे।और अगर आप 335 वाट के सोलर पैनल लगा रहे हैं तब इसके लिए 335 वाट के 3 सोलर पैनल पर्याप्त हैं।

सवाल: 1 किलोवाट सोलर सिस्टम लगाने के लिए कितनी जगह की जरूरत पड़ती है?


उत्तर: 1 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट लगाने के लिए आपको 100 वर्ग फ़ीट छाया मुक्त जगह की जरूरत पड़ती है।

सवाल: मेरे ऑफिस में 2 पंखे, कुछ एलईडी लाइट और 2 कंप्यूटर हैं। मेरे लिए कौन सी क्षमता का सोलर पॉवर सिस्टम प्लांट सबसे अच्छा रहेगा?


उत्तर: ये सभी जरूरत के विद्युत उपकरण हैं।  अगर आप इन सभी उपकरणों को सौर ऊर्जा से चलाना चाहते हैं तो आप 1kW ऑफ-ग्रिड सोलर पॉवर सिस्टम लगवा सकते हैं।

सवाल: 1 किलोवॉट सोलर प्लांट एक पूरे दिन में कितने यूनिट बिजली उतपन्न कर देता है?


उत्तर: 1 किलोवॉट सोलर पॉवर प्लांट एक दिन में लगभग 5 यूनिट बिजली उतपन्न कर देता है।और इस हिसाब से 1 माह में 150 यूनिट बिजली उतपन्न कर देता है।

सवाल: किस कंपनी का 1 किलोवाट का सोलर प्लांट लगवाना चाहिए?


उत्तर: आज के समय मे सोलर पैनल इंडस्ट्री में कई नामी कंपनियां उच्चतम क्वालिटी के सोलर पैनल,इन्वर्टर और अन्य प्रकार के सोलर उपकरण बेच रही हैं।जैसे Luminous solar, Waaree solar, Tata solar, Microtek solar, Patanjali solar जैसी कंपनियां आपको लंबे समय तक सोलर सिस्टम की वारन्टी और सर्विस दे रही हैं।इसलिए आप अपने विवेक के अनुसार कोई एक अच्छी कंपनी चुन सकते हैं।

सवाल: क्या 1 किलोवाट सोलर पॉवर प्लांट लगाने पर सरकार कोई सब्सिडी देती है?


उत्तर: जी हां भारत में सोलर पॉवर प्लांट लगाने पर सरकार 30% से 90% सब्सिडी या अनुदान देती है।सभी राज्य सरकारों की सब्सिडी परसेंटेज राज्य की सोलर पालिसी और आपके सोलर प्लांट खरीदने के उद्देश्य के अनुसार अलग अलग हो सकती है।

सवाल: 1 किलोवाट सोलर प्लांट कहाँ से खरीदें?

उत्तर: किसी भी क्षमता का सोलर पॉवर प्लांट आप लगवाना चाहते हैं तब आप हमें हमारे मोबाइल नंबर +918171168829 पर सम्पर्क कर सकते हैं।

सौर ऊर्जा से चलने वाले बैटरी चार्जर

 

सौर ऊर्जा से चलने वाले बैटरी चार्जर

सूर्य को कहीं भी ऊर्जा का सबसे अच्छा स्रोत माना जा सकता है, यदि इसका उचित उपयोग किया जाए। यह किसी अन्य की तरह एक अटूट, अक्षय ऊर्जा स्रोत है। यही कारण है कि अब हमारे पास कैलकुलेटर, घड़ियां और लाइट जैसे सौर ऊर्जा से चलने वाले उपकरण हैं। सौर प्रौद्योगिकी आज भी हमारे अधिकांश गैजेट्स के लिए ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत होने से बहुत दूर है; इसका उपयोग इन उपकरणों की बैटरी को रिचार्ज करने के लिए किया जा सकता है। उन्हें सौर ऊर्जा से चलने वाले बैटरी चार्जर कहा जाता है।


सौर ऊर्जा से चलने वाले बैटरी चार्जर क्या हैं?


जैसा कि नाम से पता चलता है, ये बैटरी चार्जर हैं जो सौर ऊर्जा द्वारा संचालित होते हैं। व्यावहारिक रूप से कोई भी आधुनिक गैजेट जिसके बारे में आप सोच सकते हैं (लैपटॉप, सेल फोन, पीडीए, एमपी3 प्लेयर, आईपोड, डिजिटल कैमरा, आदि) को इन चार्जर का उपयोग करके रिचार्ज किया जा सकता है। आजकल, इन्हें अन्य उत्पादों के साथ-साथ कारों और बैकपैक्स के साथ एकीकृत किया गया है। इसके अलावा, विभिन्न वोल्टेज क्षमताएं उपलब्ध हैं जिससे चार्जर खरीदना आसान हो जाता है जो हमारी आवश्यकताओं के लिए सबसे उपयुक्त होगा।


वे कैसे काम करते हैं?



इन बैटरी चार्जर्स में सौर पैनल होते हैं जो फोटोवोल्टिक (पीवी) सेल ब्लॉक से बने होते हैं जो सूर्य के प्रकाश से बिजली पैदा करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। जब सूर्य के प्रकाश से फोटॉन सौर पैनलों सेटकराते हैं, तो वे पीवी कोशिकाओं द्वारा अवशोषित हो जाते हैं। कोशिकाएँ सिलिकॉन जैसे अर्धचालक पदार्थों से बनी होती हैं। दो प्रकार के सिलिकॉन का उपयोग किया जा सकता है अर्थात् क्रिस्टलीय और अनाकार, जिनमें से बाद वाला अधिक टिकाऊ, लचीला और लागत प्रभावी है। अवशोषित फोटॉन तब इलेक्ट्रॉनों में परिवर्तित हो जाते हैं।

बैटरियों में एक रासायनिक प्रतिक्रिया होती है जो हमारे उपकरणों के इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में इलेक्ट्रॉनों को स्थानांतरित करती है। इस प्रक्रिया के दौरान, अवशिष्ट कण धीमे हो जाते हैं और अंततः इलेक्ट्रॉनों के उत्पादन को रोक देते हैं। इस डिस्चार्ज चक्र को सौर पैनलों द्वारा उत्पादित करंट के माध्यम से काउंटर किया जाता है, जिसमें इलेक्ट्रॉनों के आकर्षण का उपयोग करके प्रोटॉन को बैटरी की कोशिकाओं में खींचा जाता है।

अधिकांश सौर ऊर्जा से चलने वाले बैटरी चार्जर में क्षमता के मामले में 12 वोल्ट होते हैं लेकिन अन्य वोल्टेज क्षमताएं होती हैं जैसे कि 24V, 36V और इसी तरह। कम से कम 3 वोल्ट के बैटरी चार्जर भी हैं जिनका उपयोग सेल फोन से 6 वोल्ट की NiCad बैटरी चार्ज करने के लिए किया जा सकता है। एक खरीदने से पहले, सुनिश्चित करें कि आप जो चाहते हैं उस पर काफी शोध करें और किसी विशेषज्ञ से पूछने से न डरें।

इसे समझना थोड़ा जटिल हो सकता है लेकिन यह जानना कि यह कैसे काम करता है, इसकी सराहना करने की दिशा में पहला कदम है।


लागत कुशल


गैर-रिचार्जेबल बैटरी पर पैसे बचाएं, अगर आप किसी बैटरी का उपयोग करते हैं

  • बिजली के उपयोग और उसकी संबंधित लागतों को बचाएं
  • बिजली उपलब्ध न होने की स्थिति में आसानी से उपलब्ध ऊर्जा का वैकल्पिक स्रोत
  • अगर बिजली की आपूर्ति काट दी गई है
  • यदि आप किसी दूरस्थ स्थान पर हैं (ऊबड़-खाबड़ पहाड़, अलग-थलग पड़े द्वीप, आदि)


सुवाह्यता


चाहे आप बहुत यात्रा कर रहे हों या जंगल में डेरा डाले हुए हों, अपने गैजेट्स को चार्ज करने के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाले बैटरी चार्जर से बेहतर कोई विकल्प नहीं है।


सहनशीलता


सौर ऊर्जा से चलने वाले बैटरी चार्जर हालांकि एक उज्ज्वल, धूप वाले दिन में सबसे प्रभावी होते हैं; वे ठंडे मौसम में भी कुशल हो सकते हैं। कुछ वाटरप्रूफ भी हैं।


सुविधा


कुछ सौर बैटरी चार्जर में एक आंतरिक बैटरी होती है जो ऊर्जा भंडारण करने में सक्षम होती है। यदि आपको किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को चार्ज करने की आवश्यकता है और आपके पास ऊर्जा एकत्र करने के लिए सूर्य के प्रकाश का उपयोग करने का समय या अवसर नहीं है, तो बैटरी में संग्रहीत ऊर्जा का उपयोग उस उपकरण को चार्ज करने के लिए किया जाएगा।

कुछ सामान्य प्रकार के सोलर बैटरी चार्जर


ऑटोमोटिव सोलर ट्रिकल चार्जर

विशेष रूप से वाहनों के लिए डिज़ाइन किए गए, इन चार्जर्स को आसानी से डैशबोर्ड पर रखा जा सकता है और सीधे सिगरेट लाइटर प्लग से जोड़ा जा सकता है, जो बदले में, आपकी कार की बैटरी को धीरे-धीरे चार्ज करेगा।

इन चार्जर्स में आमतौर पर कार की बैटरी को पूरी तरह से चार्ज करने के लिए पर्याप्त बड़ा सोलर पैनल नहीं होता है, लेकिन यह कार की हमेशा चालू सुविधाओं जैसे घड़ी की खपत की ऊर्जा की भरपाई करने के लिए पर्याप्त है।


क्लैमशेल सोलर चार्जर


क्लैमशेल सोलर चार्जर

सौर पैनलों को सुविधा और सुवाह्यता के लिए फोल्डिंग केस के अंदर रखा गया है।

यह कई प्लग और एडेप्टर के साथ आ सकता है जो विभिन्न प्रकार के उपकरणों के साथ उपयोग करना आसान बनाता है।

कुछ को सीधे डिवाइस से प्लग करने के लिए डिज़ाइन किया गया है और अन्य को बैटरी को अलग से चार्ज करने और आसानी से उन्हें स्वैप करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।


फोल्डिंग सोलर चार्जर


लचीली पतली-फिल्म सौर कोशिकाओं का उपयोग करके, इस चार्जर को पोर्टेबिलिटी के लिए रोल अप किया जा सकता है और अधिक सतह क्षेत्र एक्सपोजर की अनुमति देने के लिए उपयोग में होने पर खोला जा सकता है।


सौर बैग


सोलर सौर बैग

सभी प्रकार के बैग (बैकपैक, लैपटॉप बैग, ब्रीफकेस, आदि) के साथ इन सफल सौर कोशिकाओं का एकीकरण शुद्ध प्रतिभा है। ये उस उपकरण को चार्ज कर सकते हैं जिसे वे विशेष रूप से ले जाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं जो उन्हें चलते-फिरते यात्रियों के लिए बहुत सुविधाजनक बनाते हैं।

कुछ में बिल्ट-इन पाउच भी होते हैं जो डबल ए और/या ट्रिपल ए बैटरी चार्ज कर सकते हैं।


क्या ये सोलर बैटरी चार्जर पूरी तरह से चार्जर की जगह ले सकते हैं?


अगर आप मुझसे पूछें तो मुझे ना कहना पड़ेगा। हमारे उपकरण वर्तमान में इन चार्जरों की तुलना में बहुत अधिक ऊर्जा की खपत करते हैं। समय सोना है और अधिकांश लोगों के पास चार्जिंग चक्र के पूरा होने की प्रतीक्षा करने का समय नहीं है। हालांकि, किसी भी सफल तकनीक की तरह, आपको इसे विकसित करने और सुधारने का मौका देना होगा और ऐसा करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि उपभोक्ता इसका उपयोग करें और अपनी प्रतिक्रिया दें। हाइब्रिड कारें हैं तो हाइब्रिड चार्जर भी हैं। हाइब्रिड तकनीक हमारे द्वारा उपयोग की जाने वाली और हमें अभ्यस्त होने के बीच की खाई को पाटने का उत्तर है। यहां तक ​​कि अगर उस पर प्रीमियम मूल्य का टैग है, तो भी लाभ अपने लिए बोलते हैं।

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